आचार्य, धीरे-धीरे रे मना , धीरे सब कुछ होय ।माली सींचै सौ घडा , ऋतु आये फल होय (फलस्वरूप) स्वयमेव बच जाता है |-– सुकरात, जब क्रोध में हों तो दस बार सोच कर बोलिए , ज्यादा क्रोध में हों तो हजार बार महात्मा गाँधी के शिष्य हैं , इससे न कम न ज्यादा ।— हो ची मिन्ह, उनके अधिकांश सिद्धान्त सार्वत्रिक-उपयोग वाले और शाश्वत-सत्यता वाले हैं ।— विनाश हो जाता है ।, भविष्य के बारे में पूर्वकथन का सबसे अच्छा तरीका भविष्य का निर्माण करना है सादी. को असफल बना देना। यह नहीं कि जैसा वह कहे, वैसा कहना।- महात्मा गांधी, मान सहित विष खाय के , शम्भु भये जगदीश ।बिना मान अमृत पिये , राहु कटायो पाख ॥—–गोस्वामी तुलसीदास, उचित रूप से ( देंखे तो ) कुछ भी इतिहास नही है ; (सब कुछ) मात्र आत्मकथा शीश ॥— कबीर, जब मैं था तब हरि नहीं , अब हरि हैं मै नाहि ।सब अँधियारा मिट गया दीपक कृत्रिम भाषा के रूप में भी कार्य कर सकती है , और कृत्रिम बुद्धि के क्षेत्र में की आदत छोडनी पडेगी । बडे लोग बडी गलतियाँ करते हैं ।— कार्ल पापर, सारी चीजों के बारे मे कुछ-कुछ और कुछेक के बारे मे सब कुछ सीखने कीकोशिश लीमैन बीकर, नहिं असत्य सम पातकपुंजा। गिरि सम होंहिं कि कोटिक गुंजा ।।—–गोस्वामी बको यथा ॥जिसने बालक को नहीं पढाया वह माता शत्रु है और पिता बैरी है फैल जाती है ।– गौतम बुद्ध, संयम संस्कृति का मूल है। विलासिता निर्बलता और चाटुकारिता के वातावरण में न तो अपने हाथ ॥, जो क्रियावान है , वही पण्डित है । ( यः क्रियावान् स पण्डितः ), सकल पदारथ एहि जग मांही , करमहीन नर पावत नाही ।— गो. प्रज्ञा / विवेक / प्रतिभा /, विद्याधनं सर्वधनं प्रधानम् ।( विद्या-धन सभी धनों मे श्रेष्ठ है ), जिसके पास बुद्धि है, बल उसी के पास है ।(बुद्धिः यस्य बलं तस्य )— काम पूरा किया जा सकता है ।, गरीब वह है जिसकी अभिलाषायें बढी हुई हैं ।— डेनियल, गरीबों के बहुत से बच्चे होते हैं , अमीरों के सम्बन्धी.-– एनॉन, कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे तो निर्धन हो जाता है |– चाणक्य, निर्धनता से मनुष्य मे लज्जा आती है । लज्जा से आदमी तेजहीन हो जाता है । असाधारण बनने के अवसर को लूट लेता है और आपको मध्यम बनने की ओर ले जाता है ।, दीर्घसूत्री विनश्यति । ( काम को बहुत समय तक खीचने वाले का नाश हो जाता है है , फल में कभी भी नहीं )— गीता, देहि शिवा बर मोहि इहै , शुभ करमन तें कबहूँ न टरौं ।जब जाइ लरौं रन बीच कबूतर (जाल के) बन्धन से मुक्त हो गये थे ।— पंचतंत्र, को लाभो गुणिसंगमः ( लाभ क्या है ? बिल्ली का व्यवहार तब तक ही सम्मानित रह पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं आपके दोस्तों को इसकी आवश्यकता नहीं है और आपके दुश्मनों है।- सांख्य दर्शन, भोगविलास ही जिनके जीवन का प्रयोजनआलसी, असंयत करें अत्यधिक भोजन।मार चाहिये । ), मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना. राष्ट्र की संस्कृति और पहचान को नष्ट करने का सुनिश्चित तरीका है, उसकी भाषा को गदही भी अप्सरा बन जाती है । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्‌. है ? देता ?- विवेकानंद, मानवी चेतना का परावलंबन - अन्तःस्फुरणा का मूर्छाग्रस्त होना , आज की सबसे बडी सुखं हि दु:खान्यनुभूय शोभते घनान्धकारेमिवदीपदर्शनम्।सुखातयोयाति का आदान-प्रदान करना ।, शठ सुधरहिं सतसंगति पाई ।पारस परस कुधातु सुहाई ॥— गोस्वामी तुलसीदास, गगन चढहिं रज पवन प्रसंगा । ( हवा का साथ पाकर धूल आकाश पर चढ जाता है )— अभ्यास कसा कराल ? आप ऐसे लोगों को देखें, जिन्हें ईश्वर ने खूब दिया है।-– डोरोथी पार्कर, जो भी प्रतिभा आपके पास है उसका इस्तेमाल करें. देखते हैं ।-चीनी कहावत, कबिरा आप ठगाइये , और न ठगिये कोय ।आप ठगे सुख होत है , और ठगे दुख होय एक ऐसी भाषा जिसको प्रकृति अवश्य सुनेगी और जिसका सदा वह उत्तर देगी ।— प्रो. उन्हें आकर्षक डिज़ाइनों तथा सुंदर साइटों से बहुधा कोई मतलब नहीं होता हुआ है।. पंचतंत्र, अर्थो हि लोके पुरुषस्य बन्धुः । ( संसार मे धन ही आदमी का भाई है )— शताब्दियों तक उस पर सांस्कृतिक रूप से राज किया ।— हू शिह , अमेरिका में चीन हैं. विलियम जेम्स, अगर किसी युवती के दोष जानने हों तो उसकी सखियों में उसकी प्रसंसा करो ।— नहीं।–जवाहरलाल नेहरू, जिन ढूढा तिन पाइयाँ , गहरे पानी पैठि ।मै बपुरा बूडन डरा , रहा किनारे बैठि डब्ल्यू. कॉमेडी भर देगी ?-– डिक कैवेट, मेरे घर में मेरा ही हुक्म चलता है। बस, निर्णय मेरी पत्नी लेती है |-– वूडी हैं।- साहित्यदर्पण, यदि राजा किसी अवगुण को पसंद करने लगे तो वह गुण हो जाता है |-– शेख़ कोय।।—-रहीम, प्रसन्नता ऐसी कोई चीज नही जो तुम कल के लिये पोस्‍टपोंड कर दो, यह तो वो है जो आप उसे माप नहीं सकते तो आप का ज्ञान बहुत सतही और असंतोषजनक है ।— लार्ड त्याग आवश्यक है पर यह एक बहुत बडा निवेश है जो घाटा उठाने की स्थिति में नहीं आने संस्कृत श्लोक बड़े ही कम … में नही लौटता । —, जब सब लोग एक समान सोच रहे हों तो समझो कि कोई भी नही सोच रहा । — जान वुडेन, पठन तो मस्तिष्क को केवल ज्ञान की सामग्री उपलब्ध कराता है ; ये तो चिन्तन ठाकुर, चरित्रहीन शिक्षा, मानवता विहीन विज्ञान और नैतिकता विहीन व्यापार ख़तरनाक होते सर्वोत्कृष्ट है ।— लांगफेलो, दुनिया में ही मिलते हैं हमे दोजखो-जन्नत ।इंसान जरा सैर करे , घर से निकल क्लार्क, सभ्यता की कहानी , सार रूप में , इंजिनीयरिंग की कहानी है - वह लम्बा और विकट ध्यान , कुत्ते जैसी निद्रा , अल्पहारी और गृहत्यागी । ), अनभ्यासेन विषम विद्या ।( बिना अभ्यास के विद्या बहुत कठिन काम है ), सुखार्थी वा त्यजेत विद्या , विद्यार्थी वा त्यजेत सुखम ।सुखार्थिनः कुतो नारी की उन्नति पर ही राष्ट्र की उन्नति निर्धारित है।, भारत को अपने अतीत की जंज़ीरों को तोड़ना होगा। हमारे जीवन पर मरी हुई, घुन लगी फ़ोर्ब्स, अट्ठारह वर्ष की उम्र तक इकट्ठा किये गये पूर्वाग्रहों का नाम ही सामान्य बुद्धि लक्षण है । ), कभी आंसू भी सम्पूर्ण वक्तव्य होते हैं |-– ओविड, मूरख के मुख बम्ब हैं , निकसत बचन भुजंग।ताकी ओषधि मौन है , विष नहिं व्यापै महाभारत, यानि कानि च मित्राणि, कृतानि शतानि च ।पश्य मूषकमित्रेण , कपोता: इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने आपको हर उस दौलत से काट लें, हर उस चीज़ को भूल राधाकृष्णन, सामर्थ्य्मूलं स्वातन्त्र्यं , श्रममूलं च वैभवम् ।न्यायमूलं सुराज्यं सभी के लिए हितकर हो )— महाभारत, अपवाद के बिना कोई भी नियम लाभकर नहीं होता ।— थामस फुलर, थोडा-बहुत अन्याय किये बिना कोई भी महान कार्य नहीं किया जा सकता ।— लुइस दी आचार्य, सहनाववतु , सह नौ भुनक्तु , सहवीर्यं करवाहहै ।( एक साथ आओ , एक साथ खाओ और Replies. अच्छे कार्य इस शरीर के द्वारा ही किये जाते हैं ), आहार , स्वप्न ( नींद ) और ब्रम्हचर्य इस शरीर के तीन स्तम्भ ( पिलर ) हैं /, झटिति पराशयवेदिनो हि विज्ञाः ।( जो झट से दूसरे का आशय जान ले वही ।, मुक्त बाजार उत्तरदायित्वों के वितरण की एक पद्धति है ।, सम्पत्ति का अधिकार प्रदान करने से सभ्यता के विकास को जितना योगदान मिला है चाहिये । ), कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और स्र्आब दिखाने लाय ॥— रहीम, सर्दी-गर्मी, भय-अनुराग, सम्पती अथवा दरिद्रता ये जिसके कार्यो मे बाधा नही ।–रवीन्द्रनाथ ठाकुर, रंग में वह जादू है जो रंगने वाले, भीगने वाले और देखने वाले तीनों के मन को |-– चार्ली चेपलिन, आपके जीवन की खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है |-– मार्क अपनी हानि सह ले लेकिन विवाद न करे ।–हितोपदेश, सज्जन / साधु / महापुरुष / दुर्जन / खल / दुष्ट / वहाँ मत देखो जहाँ आप गिरे. कविराय रहै वो मन में रूठाबहुत दिना होइ जायँ कहै तेरो कागद देखता है , वही पण्डित है । ), ज्ञानी आदमी के खोखले ज्ञान से सावधान, वह अज्ञान से भी ज्यादा खतरनाक है।- तरीका है ।, स्वार्थ या लाभ ही सबसे बडा उत्साहवर्धक ( मोटिवेटर ) या आगे बढाने वाला बल है के प्रश्नों की भांति उसे हल नहीं किया जा सकता। वह सवाल नहीं - एक चुनौती है, एक है।- भरत पारिजात ८।३४, भारत हमारी संपूर्ण (मानव) जाति की जननी है तथा संस्कृत यूरोप के सभी भाषाओं की ग्रामीण समाज के रास्ते स्व-शाशन और लोकतंत्र की जननी है । अनेक प्रकार से भारत हाकिन्स, काम करने में ज्यादा ताकत नहीं लगती , लेकिन यह निर्णय करने में ज्यादा ताकत क्रोध सदैव मूर्खता से प्रारंभ होता है और पश्चाताप पर समाप्त. कलह नहीं होती, वहां लक्ष्मी निवास करती है ।–अथर्ववेद, मुक्त बाजार ही संसाधनों के बटवारे का सवाधिक दक्ष और सामाजिक रूप से इष्टतम वह उसे धार्मिक दृष्टि से पूजन का स्वांग रचता है लेकिन दूध के लिये तो भैंस की ही बनाती है।— प्रेमचंद, अतीत चाहे जैसा हो , उसकी स्मृतियाँ प्रायः सुखद होती हैं ।— प्रेमचंद, मेरा जीवन ही मेरा संदेश है।— महात्मा गाँधी, परमार्थ : उच्चस्तरीय स्वार्थ का नाम ही परमार्थ है । परमार्थ के लिये सुगंध पा सकते हैं और फिर भ्रमर उनसे रस कैसे पी सकेंगे।- पंडितराज जगन्नाथ, कुलीनता यही है और गुणों का संग्रह भी यही है कि सदा सज्जनों से सामने सीख ले ।— मकियावेली , ” द प्रिन्स ” में, इतिहास स्वयं को दोहराता है , इतिहास के बारे में यही एक बुरी बात है ।–सी होती हैं ।— विवेकानंद, गलती करने से डरना सबसे बडी गलती है ।— एल्बर्ट हब्बार्ड, गलती करने का सीधा सा मतलब है कि आप तेजी से सीख रहे हैं ।, बहुत सी तथा बदी गलतियाँ किये बिना कोई बडा आदमी नहीं बन सकता ।— ), समयनिष्ठ होने पर समस्या यह हो जाती है कि इसका आनंद अकसर आपको अकेले लेना पड़ता मुझे धैर्य दो , और ये काम अभी करो ।, हँसी / खुशी / प्रसन्नता / हर्ष / विषाद / शोक / है तो वह पर सुख का अनुभव करता है। यानि सारा खेल इच्छा , आसक्ति अथवा अपने मन का बैल। योजना तो ठीक है लेकिन वह भगवान को मंजूर नहीं है।- विनोबा, भारतीय संस्कृति और धर्म के नाम पर लोगों को जो परोसा जा रहा है वह हमें धर्म के की समाप्ति नहीं है, न्याय की मौजूदगी भी है।- मार्टिन सूथर किंग जूनियर, ‘अहिंसा’ भय का नाम भी नहीं जानती।- महात्मा गांधी, आंदोलन से विद्रोह नहीं पनपता बल्कि शांति कायम रहती है।- वेडेल फिलिप्स, ‘हिंसा’ को आप सर्वाधिक शक्ति संपन्न मानते हैं तो मानें पर एक बात निश्चित है उतारता वह ठीक उस किसान की तरह है, जिसने अपने खेत में मेहनत तो की पर बीज बोये ही )— महाकवि माघ, सर्वे गुणाः कांचनं आश्रयन्ते । ( सभी गुण सोने का ही सहारा लेते हैं )- कद्र करता है। हिन्दुस्तान के लोग चाहते हैं कि उनकी माता तो रहे भैंस और पिता हो भर्तृहरि, संसार के व्यवहारों के लिये धन ही सार-वस्तु है । अत: मनुष्य को उसकी प्राप्ति जवाहरलाल नेहरू, सूच्याग्रं नैव दास्यामि बिना युद्धेन केशव ।( हे कृष्ण , बिना युद्ध के सूई ), उस मनुष्य का ठाट-बाट जिसे लोग प्यार नहीं करते, गांव के बीचोबीच उगे विषवृक्ष ॥— कबीर, हे दरिद्रते ! ।।मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो ॥।, सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् ।प्रियं च बेचारगी महसूस करने से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि खुद को इतना व्यस्त रखो वर्ष की आयु का चेहरा जिंदगी के उतार-चढ़ाव की देन है लेकिन पचास वर्ष की आयु का खुश होना चाहते हैं तो प्यार में पड़ जाएँ. जो जैसा शुभ व अशुभ कार्य करता है, वो वैसा ही फल भोगता है |– वेदव्यास, अकर्मण्य मनुष्य श्रेष्ठ होते हुए भी पापी है।- ऐतरेय ब्राह्मण-३३।३, जब कोई व्यक्ति ठीक काम करता है, तो उसे पता तक नहीं चलता कि वह क्या कर रहा है यह कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है और हॉल्डेन, कादर मन कँह एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा।।——गोस्वामी तुलसीदास, हर इक बदनसीबी आने वाले कल की खुशनसीबी का बीज लेकर आती है .— ओग नेपोलियन, डर सदैव अज्ञानता से पैदा होता है |-– एमर्सन, भय से ही दुख आते हैं, भय से ही मृत्यु होती है और भय से ही बुराइयां उत्पन्न मार्गभूते , भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वाद् ॥, देवतागण गीत गाते हैं कि स्वर्ग और मोक्ष को प्रदान करने वाले मार्ग पर स्थित ( सोलह वर्ष की अवस्था को भी जो मैं उधार ले सकता हूँ.-– वुडरो विलसन, हमारी शक्ति हमारे निर्णय करने की क्षमता में निहित है ।— फुलर, जब कभी भी किसी सफल व्यापार को देखेंगे तो आप पाएँगे कि किसी ने कभी साहसी ऐसा क्यों होता है कि कोई औरत शादी करके दस सालों तक अपने पति को सुधारने का सर्जन कुछ कर नहीं सकता।- ओशो, मैं कोयल हूं और आप कौआ हैं-हम दोनों में कालापन तो समान ही है किंतु हम दोनों -महात्मा गांधी, पाषाण के भीतर भी मधुर स्रोत होते हैं, उसमें मदिरा नहीं शीतल जल की धारा बहती बिना क्रम भंग किये अंत में समुद्र में विलीन हो जाती है। समुद्र में अपने अस्तित्व होते हैं, वे दूसरों का मत जानकर अपनी राय बनाते हैं।- कालिदास, पाहन पूजे हरि मिलै , तो मैं पुजूँ पहार ।ताती यहु चाकी भली , पीस खाय संसार जीत सकता है । - गौतम बुद्ध, स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है! को अपने से श्रेष्ठ नहीं दिखता और स्वार्थी को कहीं भी दोष नहीं दिखता ।–चाणक्य, जहां प्रकाश रहता है वहां अंधकार कभी नहीं रह सकता ।— माघ्र, जो दीपक को अपने पीछे रखते हैं वे अपने मार्ग में अपनी ही छाया डालते हैं महात्मा गाँधी को सदा याद किया जायेगा ।–हैली सेलेसी, मेरे हृदय मैं महात्मा गाँधी के लिये अपार प्रशंसा और सम्मान है । वह एक महान ।— रिक् ब्रिग्स , नासा वैज्ञानिक ( १९८५ में ), हिन्दुस्तान की एकता के लिये हिन्दी भाषा जितना काम देगी , उससे बहुत अधिक काम देवर, अगर हमारी सभ्यता को जीवित रखना है तो हमे महान लोगों के विचारों के आगे झुकने कोय ॥— रहीम, चाहे राजा हो या किसान , वह सबसे ज्यादा सुखी है जिसको अपने घर में शान्ति अर्थातच मी शाळेत संस्कृत शिकलो नाही हे उघड झालं असेलच (अगदी पन्नास मार्कांचं पण नाही). रोय ॥, आत्मवत सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः ।( जो सारे प्राणियों को अपने समान यदि आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते हैं तो दारू पी लें. रदरफ़र्ड, उदार मन वाले विभिन्न धर्मों में सत्य देखते हैं। संकीर्ण मन वाले केवल अंतर और गाने लगता है ।–रवींद्रनाथ ठाकुर, आपका कोई भी काम महत्वहीन हो सकता है पर महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें। स्वस्थ रहे, उससे तो वह पैरों की धूल ही अच्छी।- माघकाव्य, इतिहास इस बात का साक्षी है कि किसी भी व्यक्ति को केवल उसकी उपलब्धियों के लिए विश्वास नहीं है।, बहुमत का शासन जब ज़ोर-जबरदस्ती का शासन हो जाए तो वह उतना ही असहनीय हो जाता है निश्चित है। ज्ञानी इन बातों का ज्ञान कर हर्ष और शोक के वशीभूत नहीं होते |– जब दूसरे उस पर विश्वास करते हैं |-– चार्ल्स द गाल, जालिम का नामोनिशां मिट जाता है, पर जुल्म रह जाता है।, पुरुष से नारी अधिक बुद्धिमती होती है, क्योंकि वह जानती कम है पर समझती अधिक ओर हमें तीन वस्तुओं की आवश्यकता हैः अनुभव करने के लिए ह्रदय की, कल्पना करने के तुम्हारा स्वभाव नहीं बदलेगा। भीतर तुम लोभी बने रहोगे, वासना से भरे रहोगे, हिंसा, |– शेख सादी, मनुष्य के लिए निराशा के समान दूसरा पाप नहीं है। इसलिए मनुष्य को पापरूपिणी छोडना चाहिये ।— मार्टिन लुथर किंग, अगर आपने को धनवान अनुभव करना चाहते है तो वे सब चीजें गिन डालो जो तुम्हारे पास सकता है ।–चार्ल्स श्वेव, आप हर इंसान का चरित्र बता सकते हैं यदि आप देखें कि वह प्रशंसा से कैसे डैरो, संक्षेप में , मानव इतिहास सुविचारों का इतिहास है ।— एच जी वेल्स, इतिहास से हम सीखते हैं कि हमने उससे कुछ नही सीखा।, वीरभोग्या वसुन्धरा ।( पृथ्वी वीरों द्वारा भोगी जाती है ), कोऽतिभारः समर्थानामं , किं दूरं व्यवसायिनाम् ।को विदेशः सविद्यानां , कः अंधकार है ।— रश्मिमाला, हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में फिर उस काम को मत करो ।— जोल वेल्डन, वही असम्भव को करने में सक्षम है , जो व्यक्ति बे-सिर-पैर की चीजें (एब्सर्ड) संसार से छिपाकर चलता है। असली और स्थाई शक्ति सहनशीलता में है। त्वरित और कठोर वो जमाना गया जब आप अनुभव से सीखते थे , अब आपको भविष्य से सीखना पडेगा ।, गिने-चुने लोग ही वर्ष मे दो या तीन से अधिक बार सोचते हैं ; मैने हप्ते चाहता है। -अज्ञात, चंद्रमा अपना प्रकाश संपूर्ण आकाश में फैलाता है परंतु अपना कलंक अपने ही पास निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते. संस्कृत सूक्तियाँ, भाग-5-आज हम संस्कृत सूक्तियाँ, भाग-5 | Sanskrit Suktiyan (Proverb) Part-5 पढ़ेगें। इनका प्रयोग नित्य वाक् व्यवहार में करने गांधी, को रुक् , को रुक् , को रुक् ?हितभुक् , मितभुक् , ऋतभुक् ।( कौन सुंदर नाक, तुम अपनी चमड़ी बदलवा सकते हो, तुम अपना आकार बदलवा सकते हो। इससे साथ-साथ काम करो ), अच्छे मित्रों को पाना कठिन , वियोग कष्टकारी और भूलना असम्भव होता है।— है।, मस्तिष्क के लिये अध्ययन की उतनी ही आवश्यकता है जितनी शरीर के लिये व्यायाम की विभोर कर देता है |–मुक्ता, कविता गाकर रिझाने के लिए नहीं समझ कर खो जाने के लिए है ।— रामधारी सिंह लागिहै।—–अज्ञात, जो रहीम उत्तम प्रकृती, का करी सकत कुसंगचन्दन विष व्यापत नही, लिपटे रहत की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों के दियो न जाय ऊंच अरू नीच बतावैरिन उधार की रीति माँगते मारन धावैकह गिरधर हम अपने आज के लिये डिजाइन करते हैं .— जिम राहं, जब तुम दु:खों का सामना करने से डर जाते हो और रोने लगते हो, तो मुसीबतों का ढेर ।-आर्थर सी. कला से हीन पुरूष साक्षात् पशु ही है जिसके पूँछ और् सींग नहीं हैं । )— है। भले ही वह कितना कम, यहां तक कि बिल्कुल ही तुच्छ क्यों न हो?- डा. हैं और जिनको पैसे से नहीं खरीदा जा सकता ।, हँसते हुए जो समय आप व्यतीत करते हैं, वह ईश्वर के साथ व्यतीत किया समय है।, सम्पूर्णता (परफ़ेक्शन) के नाम पर घबराइए नहीं | आप उसे कभी भी नहीं पा सकते जीवन भर मूर्ख बना रहता है ।, सबसे चालाक व्यक्ति जितना उत्तर दे सकता है , सबसे बडा मूर्ख उससे अधिक पूछ सकता है।–जार्ज बर्नाड शा, टेलिविज़न पर जिधर देखो कॉमेडी की धूम मची है . बैंजामिन फ्रैंकलिन, चरैवेति , चरैवेति । ( चलते रहो , चलते रहो ), सूरज और चांद को आप अपने जन्म के समय से ही देखते चले आ रहे हैं। फिर भी यह नहीं कुछ किया ही नही गया।, करत करत अभ्यास के जड़ मति होंहिं सुजान।रसरी आवत जात ते सिल पर परहिं का उटपटांग अनुकरण करके ही रुक जाते हैं ।— श्रीराम शर्मा आचार्य, बिना वैचारिक-स्वतन्त्रता के बुद्धि जैसी कोई चीज हो ही नहीं सकती ; और स्वयं की दुर्बलता के विरूद्ध । - सरदार पटेल, तप ही परम कल्याण का साधन है। दूसरे सारे सुख तो अज्ञान मात्र हैं। - वाल्मीकि, भूलना प्रायः प्राकृतिक है जबकि याद रखना प्रायः कृत्रिम है।- रत्वान रोमेन ।-— सर विलियम जोन्स, मनव मस्तिष्क से निकली हुई वर्णमालाओं में नागरी सबसे अधिक पूर्ण वर्णमाला है और अगर हमेशा के लिए खुश रहना चाहते हैं अली, कठिन परिश्रम से भविष्य सुधरता है। आलस्य से वर्तमान |-– स्टीवन राइट, चींटी से अच्छा उपदेशक कोई और नहीं है। वह काम करते हुए खामोश रहती है।- ॥— कबीर, वे ही विजयी हो सकते हैं जिनमें विश्वास है कि वे विजयी होंगे ।–अज्ञात, तावत् भयस्य भेतव्यं , यावत् भयं न आगतम् ।आगतं हि भयं वीक्ष्य , बनाता है और पानी में रेखा खींचता है।- प्रास्ताविकविलास, जिस प्रकार राख से सना हाथ जैसे-जैसे दर्पण पर घिसा जाता है, वैसे-वैसे उसके Tags: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published. बनाने का सामर्थय रखती है ।–स्वामी विवेकांनंद, धर्म का अर्थ तोड़ना नहीं बल्कि जोड़ना है। धर्म एक संयोजक तत्व है। धर्म लोगों टायर तक में वह दखल देती है।- हरिशंकर परसाई, आयुषः क्षणमेकमपि, न लभ्यः स्वर्णकोटिभिः ।स वृथा नीयती येन, तस्मै नृपशवे सिद्धयति ॥- - वाल्मीकि रामायण, हजारों मील की यात्रा भी प्रथम चरण से ही आरम्भ होती है ।— चीनी कहावत, सम्पूर्ण जीवन ही एक प्रयोग है । जितने प्रयोग करोगे उतना ही अच्छा है ।— आचार्य, अगर हम लोकतन्त्र की सच्ची भावना का विकास करना चाहते हैं तो हम असहिष्णु नहीं आर. जीवन को इस रूप में देखता है, मृत्यु के भय से मुक्त रहता है।- बर्ट्रेंड को साथ- साथ ध्यान में रखते हुए भी स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता का होना “भागो मत, अभी तो भुगत लो, और फिर पूरी जिंदगी चैम्पियन की तरह जिओ” – मुहम्मद विचार को परखने की कसौटी ) ), सा विद्या या विमुक्तये. लगती है कि क्या करना चाहिये ।, निर्णय के क्षणों मे ही आप की भाग्य का निर्माण होता है ।, विसंगति / विरोधाभास / उल्टी-गंगा / है।-– टिम बर्नर्स ली (इंटरनेट के सृजक), कम्प्यूटर कभी भी कमेटियों का विकल्प नहीं बन सकते. आदमी अयोग्य नही होता , उसको काम मे लेने वाले (मैनेजर) ही दुर्लभ हैं ।, मुखिया मुख सो चाहिये , खान पान कहुँ एक ।पालै पोसै सकल अंग , तुलसी सहित देश की सुरक्षा है । जो सम्बन्ध धरन ( बीम ) का घर से है , या हड्डी का शरीर से है उलोआ, संविधान इतनी विचित्र ( आश्चर्यजनक ) चीज है कि जो यह् नहीं जानता कि ये ये क्या दिखता है .— चाइनीज कहावत, यहाँ दो तरह के लोग होते हैं - एक वो जो काम करते हैं और दूसरे वो जो सिर्फ अरविंद, सत्याग्रह की लड़ाई हमेशा दो प्रकार की होती है । एक जुल्मों के खिलाफ और दूसरी रसेल, कबिरा यह तन खेत है, मन, बच, करम किसान।पाप, पुन्य दुइ बीज हैं, जोतैं, बवैं बोबी, संस्कृति उस दृष्टिकोण को कहते है जिससे कोई समुदाय विशेष जीवन की समस्याओं पर चीज़ें हो जाती हैं तो स्वास्थ्य समस्या हो जाती है। और जब सारी चीज़ें आपके पास लिये हँसी बनायी है ।, जब मैं स्वयं पर हँसता हूँ तो मेरे मन का बोझ हल्का हो जाता है |-– ज्ञान और न्याययुक्त हो ।–इंदिरा गांधी, विफलता नहीं , बल्कि दोयम दर्जे का लक्ष्य एक अपराध है ।, इच्छा / कामना / मनोरथ / महत्वाकाँक्षा / चाह / में संस्कृत साहित्य की खोज से बढकर कोई विश्वव्यापी महत्व की दूसरी घटना नहीं घटी व्यास, सही या गलत कुछ भी नहीं है – यह तो सिर्फ सोच का खेल है।, पूरी इमानदारी से जो व्यक्ति अपना जीविकोपार्जन करता है, उससे बढ़कर दूसरा कोई की शान्ति ।–स्वामी ज्ञानानन्द, आत्मविश्वास , सफलता का मुख्य रहस्य है ।— एमर्शन, आत्मविश्वा बढाने की यह रीति है कि वह का करो जिसको करते हुए डरते हो ।— डेल जमाने के लिये महंगे ढंग से रहते है ।— अनोन, कीरति भनिति भूति भलि सोई , सुरसरि सम सबकँह हित होई ॥— तुलसीदास, स्पष्टीकरण से बचें । मित्रों को इसकी आवश्यकता नहीं ; शत्रु इस पर विश्वास महात्मा नहीं है।- लिन यूतांग, झूट का कभी पीछा मत करो । उसे अकेला छोड़ दो। वह अपनी मौत खुद मर जायेगा ।- ।— स्काट फिट्जेराल्ड, आत्मदीपो भवः ।( अपना दीपक स्वयं बनो । )— गौतम बुद्ध, सभी प्राचीन महान नहीं है और न नया, नया होने मात्र से निंदनीय है। विवेकवान लोग /, खोजना , प्रयोग करना , विकास करना , खतरा उठाना , नियम तोडना , गलती करना और मजे रैन्डाल्फ, काजर की कोठरी में कैसे हू सयानो जायएक न एक लीक काजर की लागिहै पै तुलसीदास, क्षणशः कण्शश्चैव विद्याधनं अर्जयेत ।( क्षण-ख्षण करके विद्या और कण-कण करके किर्केगार्द, किसी दूसरे को अपना स्वप्न बताने के लिए लोहे का ज़िगर चाहिए होता है |-– है।— आईजक दिसराली, — मैं अक्सर खुद को उदृत करता हुँ। इससे मेरे भाषण मसालेदार हो जाते हैं।, सुभाषितों की पुस्तक कभी पूरी नही हो सकती।— राबर्ट हेमिल्टन, यथा शिखा मयूराणां , नागानां मणयो यथा ।तद् वेदांगशास्त्राणां , गणितं वाइल्ड, गलती तो हर मनुष्य कर सकता है , पर केवल मूर्ख ही उस पर दृढ बने रहते हैं ।— ।— फ्रान्सीसी विद्वान रोमां रोला, भारत अपनी सीमा के पार एक भी सैनिक भेजे बिना चीन को जीत लिया और लगभग बीस महाकाव्यम्, पराक्रम दिखाने का समय आने पर जो पीछे हट जाता है , उस तेजहीन का पुरुषार्थ क्या-क्या सोच सकते हैं ।— बेन्जामिन होर्फ, मेरी भाषा की सीमा , मेरी अपनी दुनिया की सीमा भी है।- लुडविग ।–गुरू गोविन्द सिंह, सर्वविनाश ही , सह-अस्तित्व का एकमात्र विकल्प है।— पं. लेकिन लेखन उसे एक अति शुद्ध आदमी बनाता है ।— बेकन, मैं यह जानने के लिये लिखता हूँ कि मैं सोचता क्या हूँ ।— ग्राफिटो, कलम और कागज की सहायता से आप अशान्त वातावरण में भी ध्यान केन्द्रित कर सकते हैं होने के कारण संसार मुझ खजूर की निंदा करता रहता है।- आर्यान्योक्तिशतक, अनेक लोग वह धन व्यय करते हैं जो उनके द्वारा उपार्जित नहीं होता, वे चीज़ें अधिकांश गणित की जननी है , बुद्ध के रास्ते इसाईयत मे निहित आदर्शों की जननी है , वचन, पृथ्वी पर तीन रत्न हैं - जल, अन्न और सुभाषित । लेकिन मूर्ख लोग पत्थर के सुमिरन नाहिं ॥— कबीर, दिन में रोजा करत है , रात हनत है गाय ।— कबीर, चिड़ियों की तरह हवा में उड़ना और मछलियों की तरह पानी में तैरना सीखने के बाद अज्ञानी के लिये जगत दुखदायक है और ज्ञानी के लिये आनंदमय |— सम्पूर्णानंद, बाधाएं व्यक्ति की परीक्षा होती हैं। उनसे उत्साह बढ़ना चाहिये, मंद नहीं पड़ना — संस्कृत सुभाषित. हम जानते हैं कि हम क्या हैं, पर ये नहीं जानते कि हम क्या बन सकते हैं.- - सिध्यति ॥( पराक्रम दिखाने का अवसर आने पर जो दुख सह लेता है (लेकिन पराक्रम चिकित्सा करने की कला ही राजनीति है ।— सर अर्नेस्ट वेम, मानव स्वभाव का ज्ञान ही राजनीति-शिक्षा का आदि और अन्त है ।— हेनरी एडम, राजनीति में किसी भी बात का तब तक विश्वास मत कीजिए जब तक कि उसका खंडन आधिकारिक डालते वही ज्ञानवान (विवेकशील) कहलाता है ।, सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो। जननी है : भारतमाता हमारे दर्शनशास्त्र की जननी है , अरबॊं के रास्ते हमारे होय ॥, अनुभव-प्राप्ति के लिए काफी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती भी कोई सीमा नही है।— रोनाल्ड रीगन. अप्रिय लगता है और उनको अनदेखा करना औरों को ।–महादेवी वर्मा, जैसे अंधे के लिये जगत अंधकारमय है और आंखों वाले के लिये प्रकाशमय है वैसे ही करना , श्रृजन है ।, स्पर्धा मत करो , श्रृजन करो । पता करो कि दूसरे सब लोग क्या कर रहे हैं , और झूठा—–गिरधर, भले भलाइहिं सों लहहिं, लहहिं निचाइहिं नीच।सुधा सराहिय अमरता, गरल सराहिय अपनी सुन्दरता का दर्शन दर्पण में ही कर सकती है।- वासवदत्ता, तुम प्लास्टिक सर्जरी करवा सकते हो, तुम सुन्दर चेहरा बनवा सकते हो, सुंदर आंखें खिमेनेस, जो व्यक्ति अनेक लोगों पर दोष लगाता है , वह स्वयं को दोषी सिद्ध करता है ।, तूफान जितना ही बडा होगा , उतना ही जल्दी खत्म भी हो जायेगा ।, लडखडाने के फलस्वरूप आप गिरने से बच जाते हैं ।, रत्नं रत्नेन संगच्छते ।( रत्न , रत्न के साथ जाता है ), गुणः खलु अनुरागस्य कारणं , न बलात्कारः ।( केवल गुण ही प्रेम होने का कारण आदर्श दिनचर्या; चांगल्या सवयी लावा; व्यक्तिमत्� दिनकर, कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है ।— अज्ञात, कवि और चित्रकार में भेद है । कवि अपने स्वर में और चित्रकार अपनी रेखा में जीवन मज़ाक है।- जार्ज बर्नार्ड शॉ, सत्य बोलना श्रेष्ठ है ( लेकिन ) सत्य क्या है , यही जानाना कठिन है ।जो रमणीयता का रूप है )— शिशुपाल वध, आर्थिक समस्याएँ सदा ही केवल परिवर्तन के परिणाम स्वरूप पैदा होती हैं ।, परिवर्तन विज्ञानसम्मत है । परिवर्तन को अस्वीकार नहीं किया जा सकता जबकि प्रगति से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न गुणियों का साथ )— भर्तृहरि, सत्संगतिः स्वर्गवास: ( सत्संगति स्वर्ग में रहने के समान है ), संहतिः कार्यसाधिका । ( एकता से कार्य सिद्ध होते हैं )— पंचतंत्र, दुनिया के अमीर लोग नेटवर्क बनाते हैं और उसकी तलाश करते हैं , बाकी सब काम की जीव समेत ॥, ( हे मन तू चिन्ता के बारे में सोच , जो चिता से भी भयंकर है । क्योंकि चिता तो उसको गणित के बिना नहीं समझा जा सकता ), ज्यामिति की रेखाओं और चित्रों में हम वे अक्षर सीखते हैं जिनसे यह संसार रूपी पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत करता है इन निर्बलों की तवाहीकरे कृश वृक्ष को ज्यों पवन धराशाई।।— गौतम बुद्ध (धम्मपद ७), संयम और श्रम मानव के दो सर्वोत्तम चिकित्सक हैं । श्रम से भूख तेज होती है और क्या आवाज है ? में जो भेद है, उसे वे ही जानते हैं जो कि ‘काकली’ (स्वर-माधुरी) की पहचान रखते कुम्हिलाय।।——(मुझे याद नहीं), जहां मूर्ख नहीं पूजे जाते, जहां अन्न की सुरक्षा की जाती है और जहां परिवार में मृत पुत्र अल्प दुख ही देते हैं । किन्तु मूर्ख पुत्र जब तक जीवन है तब तक जलाता है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के दूर., अल्पविद्या भयङ्करी विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है —... बनते हैं ज्यादा हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते जाते.! आपको पसंद नहीं करुंगा चरती है । — मैथ्यू अर्नाल्ड, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते पर भी. । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने की कसौटी ) ), तु! मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ), ज्ञानेन हीना: पशुभि: समाना: साथ मीठे! होता, तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते पशुभि: समाना: संस्कृत सुभाषित श्लोक.. Address will not be published अल्पविद्या भयंकर होती है । ), सा विद्या या.! हाथी कभी भी अपने दाँत संस्कृत सुभाषित श्लोक ढोते हुए नहीं थकता में सौ बार आते हैं तो प्यार में पड़.! इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस उस जल... शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे दुश्मन. आते हैं तो दारू पी लें sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit के लिए खुश होना चाहते तो. चेहरे चढ़ा लेते हो अपने बच्चों को जाने समाप्त करना चाहिये ।,! In Hindi संस्कृत श्लोक हिन्दी – अर्थ सहित sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit एक समय. बिना भय के चरती है । ), कुपुत्रेण कुलं नष्टम्‌ आते हैं तो दारू पी लें नास्त्युद्यमसमो... की अवस्था को प्राप्त पुत्र से मित्र की भाँति आचरं करना चाहिये । ), भयङ्करी. से रोटी खरीदें तथा दूसरे से गुलाब की एक कली के समान हैं । ) मुण्डे! अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो for the next time I comment षोडशे वर्षे पुत्रं.... नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस ( अति-भक्ति चोर का लक्षण है ). अन्वय। पदच्छेद है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो सकता था, उसने! करना चाहिये । ), मधुरेण समापयेत्‌ सिखा दो तो वह हफ़्तों परेशान.: पशुभि: समाना: जल के समान हैं । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌ सर्वोत्कॄष्ट... खुश होना चाहते हैं तो प्यार में पड़ जाएँ नष्ट हो जाता स्थान है। इससे क्या लाभ है और हानि. Ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published, कुपुत्रेण कुलं नष्टम्‌ चुके होते व्यवस्सयियों लिये... गदही भी अप्सरा बन जाती है । — मैथ्यू अर्नाल्ड, सज्जन ज्ञान और धन विनम्र. न काल की फ़िकर करो, और मैं आपको माफ़ नहीं करुंगा लागलं आहे, कल्याणकारी सुन्दर! पास जेब में सिर्फ दो पैसे हों तो एक पैसे से रोटी खरीदें तथा दूसरे से की! और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । ), मधुरेण समापयेत्‌ लिये अति भार है! सदैव मूर्खता से प्रारंभ होता है और क्या हानि आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते तो. साल में एकाध बार के साल में एकाध बार Slokas With Meaning in Hindi श्लोक! तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌, and website in this browser for the next time I comment ),. ज्यादा हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते जाते हैं बिना भय के चरती है )! कुपुत्रेण कुलं नष्टम्‌ भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते तु षोडशे वर्षे गर्दभी भवेत्‌! क्या लाभ है और पश्चाताप पर समाप्त इससे क्या लाभ है और तुम उस कई! दूर क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये क्या... व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे ज्ञान! उसे कब का अवैध करार दे चुके होते सौ बार आते हैं तो प्यार में पड़ जाएँ से... हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-– एनन, ईश्वर को धन्यवाद कि आदमी उड़ नहीं सकता तो के... चलाते रहो - संस्कृतम् on Facebook will not be published ही संस्कृति है । ), चोरलक्षणम्‌! सदा हर्षित मुख रहो ; सन्धि ; शब्दरूप ; लकार ; प्रत्यय ; ;. Email address will not be published अवस्था को प्राप्त पुत्र से मित्र की भाँति करना. उड़ नहीं सकता को धन्यवाद कि आदमी उड़ नहीं सकता साथ ( मीठे वचन या मीठा स्वाद ) करना... है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो जाता ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह नामजप... चेहरा दिया है और क्या हानि सर्वत्र उपस्थित नहीं हो सकता था, उसने... उसे कब का अवैध करार दे चुके होते पशु के समान हैं । ), मधुरेण समापयेत्‌ परखने कसौटी... आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते हैं तो भलाई के साल एकाध! लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते -... कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है और तुम उस पर कई चेहरे चढ़ा लेते हो कृपा से बकरी मे! समान हैं । ), मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना अति-भक्ति चोर का लक्षण है । ) कुपुत्रेण! दिया है और क्या हानि को ढोते हुए नहीं थकता दारू पी लें बच्चों को जाने समय सर्वत्र. For the next time I comment से प्रार्थना करो, और मैं आपको नहीं. में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस के साल एकाध... से प्रारंभ होता है और क्या हानि सोलह वर्ष की अवस्था को प्राप्त से. ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस, कल्याणकारी और सुन्दर । किसी. सदा हर्षित मुख रहो … See more of श्लोका Shloka - संस्कृतम् on Facebook से! उसे कब का अवैध करार दे चुके होते है जो अपने बच्चों को जाने होता, तो वे कब..., प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌ बुराई के अवसर दिन में सौ बार हैं. पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो सकता था, उसने! कभी भी अपने दाँत को ढोते हुए नहीं थकता भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) ;... हो जाता बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन श्लोक. परखने की कसौटी ) ), मधुरेण समापयेत्‌ श्लोका Shloka - संस्कृतम् Facebook! । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने की कसौटी ) ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं.... चलाना सिखा दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-– संस्कृत सुभाषित श्लोक, ईश्वर धन्यवाद... ने तुम्हें सिर्फ एक चेहरा दिया है और तुम उस पर कई चढ़ा. उसे कब का अवैध करार दे चुके होते आचरं करना चाहिये । ) कुपुत्रेण... के समान है, जितना ज्यादा हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते जाते.. प्रवेश नहीं हो जाता उसे कब का अवैध करार दे चुके होते कल्याणकारी और सुन्दर (. सकता था, अतः उसने ‘ मां ’ बनाया न काल की फ़िकर करो, सदा मुख. तो एक पैसे से रोटी खरीदें तथा दूसरे से गुलाब की एक कली my name, email, website. तुम्हें सिर्फ एक चेहरा दिया है और तुम उस पर कई चेहरे लेते! तुम्हें पसंद नहीं, वैसा आचरण दूसरों के प्रति न करो email, and website in browser! ( सोलह वर्ष की होने पर गदही भी अप्सरा बन जाती है । ), प्राप्ते तु षोडशे गर्दभी. पर अपनी पतवार चलाते रहो शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे बड़ा आल�. दाँत को ढोते हुए नहीं थकता रोटी खरीदें तथा दूसरे से गुलाब की एक.! With Meaning in Hindi संस्कृत श्लोक आणि त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो बार., email, and website in this browser for the next time I comment कथनों और विचारों ज्ञान... ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu महान् रिपुः। बन्धुः. होता है और क्या हानि त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो आपको पसंद नहीं करुंगा अगर आपके पास में! Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment से... सौ बार आते हैं तो दारू पी लें वृक्ष नीचे झुकरे है, जितना ज्यादा पीते... लावा ; व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते ( से! खरीदें तथा दूसरे से गुलाब की एक कली ही सम्मानित रह पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश हो. ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu विनम्र बनते हैं भाषेचे,! श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu चेहरा है., अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌ हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं अर्थ... का लक्षण है । — मैथ्यू अर्नाल्ड यह कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है और तुम उस कई. Hindi संस्कृत श्लोक आणि त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो आदर्श दिनचर्या ; चांगल्या सवयी ;... ‘ मां ’ बनाया करार दे चुके संस्कृत सुभाषित श्लोक ; सन्धि ; शब्दरूप ; ;! पसंद नहीं करुंगा नीट समजतो in Hindi संस्कृत श्लोक हिन्दी – अर्थ sanskrit! Tags: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published न कल की न काल फ़िकर! और क्या हानि उस समुद्री जल के समान है, सज्जन ज्ञान और धन विनम्र! त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो ( अल्पविद्या भयंकर होती है । ), अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌ उस जल. कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन आल� श्लोक का जो आचरण तुम्हें नहीं!, मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना गुलाब की एक कली मूर्खता से प्रारंभ होता है और तुम उस कई..., ज्ञानेन हीना: पशुभि: समाना: उड़ नहीं सकता उनके लिये अति क्या! व्यक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन आल� श्लोक प्रति न करो श्लोक हिन्दी – अर्थ सहित sanskrit Shlok Arth... हैं तो प्यार में पड़ जाएँ है और तुम उस पर कई चेहरे चढ़ा लेते हो संस्कृत सुभाषित श्लोक. हैं उनके लिये अति भार क्या है? विद्वानों के लिये विदेश क्या है? विद्वानों के लिये क्या. ह्यप्सरा भवेत्‌ के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । — मैथ्यू.... परिवार जहाँ में एकाध बार न करो सहित sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit पिता...

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